कुछ अनकही सी ............!

अपने बारे में क्या बतलाऊं तुझे .....कोरा कागज हूँ.. कोरा पानी हूँ....! हौसले आसमान छूते हैं... थोड़ी पागल हूँ....थोड़ी ज्ञानी हूँ...!!!

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शब्द ...

Posted On: 23 Jun, 2014 Others में

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शब्द …
खिलते
महकते
झिझकते
सिसकते
खिलखिलाते
चलते
ठिठकते
लिरजते
डूबते
निकलते
शब्द में बसा संसार !!!
शब्द …
खिलते
महकते
झिझकते
सिसकते
खिलखिलाते
चलते
ठिठकते
लिरजते
डूबते
निकलते
शब्द में बसा संसार !!!

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepak pande के द्वारा
July 3, 2014

वाह श्वेता जी थोड़े ही शब्दों में सब कुछ कह दिया अद्भुत

श्वेता के द्वारा
July 3, 2014

रचना की सराहना और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार आपका

June 23, 2014

और शब्द से ही हम कहते आपका आभार सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए .

    श्वेता के द्वारा
    July 3, 2014

    सराहनिय शब्दों और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार आपका……..

Ravindra K Kapoor के द्वारा
June 23, 2014

कितनी सुन्दर रचना है शब्द अभिव्क्तिकी फिर वो चाहे मन में भाव हों या कि हृदय में गूंजता संगीत या कि उठती वेदना शब्दों में प्रगट हो निकलती है शब्दों के आकारों से ही. सुन्दर रचना कि है श्वेताजी आपने. सुभकामनाओं के साथ…रवीन्द्र के कपूर

    श्वेता के द्वारा
    July 3, 2014

    अभिभूत हुआ मन …..रचना की सराहना और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार आपका……

Ravinder kumar के द्वारा
June 23, 2014

श्वेता जी, गागर में सागर. पूरा संसार ही शब्दमय है. बेहतरीन अभिव्यक्ति, शुभकामनाएं.


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