कुछ अनकही सी ............!

अपने बारे में क्या बतलाऊं तुझे .....कोरा कागज हूँ.. कोरा पानी हूँ....! हौसले आसमान छूते हैं... थोड़ी पागल हूँ....थोड़ी ज्ञानी हूँ...!!!

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ये शाम ..............!

Posted On: 7 Apr, 2014 Others में

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ये शाम ……!!!


ये तन्हा उदास दर्द भरी शाम

अलविदा कहती पत्तों की मुस्कान

कल आने के वादे पर होती सुरमई शाम


हाथ हिलाती अलविदा कहती

ज़ख्म एक नया दे ज़ख्म एक दफ़न करती

इंतज़ार के लम्हे सिलती ये शाम


दर्द के भवर में दर्द के लहर में

अनजाने गम से नाता जोडती या तोडती

रूठती मनाती खामोश लाल रंग लिए मिटती शाम


अनकहे बोलों में हज़ार लफ्ज़ लपेटे

अश्कों की जुबान खामोश लब

ख़ुदा जाने सुना रही कौन सा गीत ये शाम

~ श्वेत ~

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

swati के द्वारा
June 23, 2014

सार्थक रचना……हार्ट टचिंग लाइन्स…

    श्वेता के द्वारा
    July 3, 2014

    रचना की सराहना और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार आपका……..

anamika के द्वारा
April 14, 2014

बहुत सुन्दर शब्दों का चयन …..उत्कृष्ट

    श्वेता के द्वारा
    April 20, 2014

    रचना की सराहना और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार आपका……..

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 14, 2014

अनकहे बोलों में हज़ार लफ्ज़ लपेटे .श्वेत जी बहुत ह्रदय स्पर्शी अभिव्यक्ति .उम्दा कविता .

    श्वेत के द्वारा
    April 14, 2014

    रचना की सराहना और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार आपका


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