कुछ अनकही सी ............!

अपने बारे में क्या बतलाऊं तुझे .....कोरा कागज हूँ.. कोरा पानी हूँ....! हौसले आसमान छूते हैं... थोड़ी पागल हूँ....थोड़ी ज्ञानी हूँ...!!!

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क्षणिकाएं !!!!

Posted On: 5 Aug, 2013 Others में

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हज़ार टुकड़े
मेरे हुए रिश्तों
की जोड़ में
हर धागा
बिखर गया
रंग ये कैसा
सुर्ख हुआ
इस मोड़ में !!!

हज़ार टुकड़े

मेरे हुए रिश्तों

की जोड़ में

हर धागा

बिखर गया

रंग ये कैसा

सुर्ख हुआ

इस मोड़ में  !!!

कुछ कच्चे धागे कुछ कच्चे थे मन
कुछ रंग थे फीके कुछ बदले ढंग

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Pradeep Kesarwani के द्वारा
September 16, 2013

भावात्मक रचना आभार

amarsin के द्वारा
August 6, 2013

बहुत सुन्दर, भाव भीनी कविता… http://amarsin.jagranjunction.com/

    Shweta के द्वारा
    August 19, 2013

    रचना की सराहना हेतु सादर आभार …

Madan Mohan saxena के द्वारा
August 5, 2013

उलझन आज दिल में है कैसी आज मुश्किल है समय बदला, जगह बदली क्यों रिश्तें आज बदले हैं जिसे देखो बही क्यों आज मायूसी में रहता है दुश्मन दोस्त रंग अपना, समय पर आज बदले हैं जीवन के सफ़र में जो पाया है सहेजा है खोया है उसी की चाह में ,ये दिल क्यों मचले है समय ये आ गया कैसा कि मिलता अब समय ना है रिश्तों को निभाने के अब हालात बदले हैं

    Shweta के द्वारा
    August 19, 2013

    बेहद खूबसूरत रचना है …… रिश्तों की रवायतें रह गयी है एक पल जो दरमियाँ था हर रिश्ता वो खामोशियाँ सह गयी है !!! सादर ……


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