कुछ अनकही सी ............!

अपने बारे में क्या बतलाऊं तुझे .....कोरा कागज हूँ.. कोरा पानी हूँ....! हौसले आसमान छूते हैं... थोड़ी पागल हूँ....थोड़ी ज्ञानी हूँ...!!!

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शब्द

Posted On: 31 Jul, 2013 Others में

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कितने बरस बीत गए
शब्द वो जो कुछ तुम
कुछ हम लम्हों में सहेज गए
कुछ धूप में कुछ स्याह में
उधेड़े और कुछ बुन गए
लम्हें उन्हें पिरो कर
तसव्वुर में सजा गए !!!
$hweta

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
August 1, 2013

वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति कभी यहाँ भी पधारें और टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |

    Shweta के द्वारा
    August 2, 2013

    हार्दिक आभार ….सादर

harirawat के द्वारा
August 1, 2013

शब्द की एक सुन्दर व्याख्या ! लेकिन शब्द सहेजे गए, बुन गए सज गए, लेकिन फिर भी शब्द अकेले रह गए !

    Shweta के द्वारा
    August 1, 2013

    शब्द साथ रह कर भी अकेले ……… सादर आभार

Sumit Sangwan के द्वारा
July 31, 2013

Good one ! Shweta.

    Shweta के द्वारा
    July 31, 2013

    Thank you So much


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